13 July, 2011

Naye naye rangon se (KAVI KALIDAS)


There are six seasons (6 ऋतुएं):
Shishir शिशिर (22 DEC.-- 19 FEB.),
Basant बसंत (20FEB.---21 APR.),
Greeshma ग्रीष्म ( 22 APR.---21JUN.),
Varsha वर्षा (22 JUNE---21AUG.),
Sharad शरद ( 22 AUG.---21 OCT.), &
Hemant हेमंत (22 OCT.---21 DEC.).
The great Sanskrit poet कालिदास described them in his famous work 'ऋतु संहार '. कवि कालिदास 1959. 
Poet कालिदास narrating his verses of 'ऋतु संहार' before a gathering of cotemporary Sanskrit scholars in काशी .
S.N.Tripathi composed this रागमालिका sung by मन्ना डे, expressing emotions hidden in verses perfectly. In the available print, description is of only three seasons: ग्रीष्म, वर्षा and शरद.
हिंदी version of 'Ritu Samhar': कालिदास starts singing" नए नए रंगों से लिखती धरती नयी कहानी || तन मन को पल भर में बदल दें ऋतुएं बड़ी सुहानी || ये ऋतुएं बड़ी सुहानी ||  

ग्रीष्म ऋतु is described in राग सारंग  as: ग्रीष्म महीने में कामिनियाँ धूप लगे कुम्हलाय | इस ऋतु में वो अगर चन्दन का, अंग में लेप लगाए ||  सूख गया है सरोवर का जल, सूख गयी सरिताएं || सूख गए हैं पीपल के दल, मुरझाई हैं लताएँ ||  जाने कहाँ घबरा के छुपी हैं, चंचल आज हवाएं ||  ऊंघ रहे डालों पर पंछी ,पंखों में चोंच छुपाये ||  अंग अंग में आलस छाया, अँखियाँ हैं अकुलानी || तन मन को पल भर में बदल दें,ऋतुएं बड़ी सुहानी || ये ऋतुएं बड़ी सुहानी || 

वर्षा ऋतु is described in राग मल्हार as: उमड़ घुमड़ घन गरजत आये, बरखा ऋतु सुखदायी ||  दादुर  मोर पपीहा बोले, हरी हरी धरती की चुनरिया डोले, बिरहन को दुखदायी ||  भीगी नार खड़ी रसवंती, रिमझिम बरसे पानी ||  पल भर में तन मन को बदल दे, ऋतुएं बड़ी सुहानी ||  ये ऋतुएं बड़ी सुहानी ||  

शरद ऋतु  in राग जौनपुरी: शरद सुहावन ऋतु मन भावन,  मदन बदन में अगन लगावन ||  कुञ्ज कुञ्ज में, वन निकुंज में,भ्रमर गुंज गुंजार करे ||  लहरों के चंचल अंचल में, शरद चंद्रिका प्यार भरे ||  पिया की बाहों में कसी  कामिनी, ,मन ही मन सकुचानी ||  तन मन को पल भर में बदल दें, ऋतुएं बड़ी

रागमालिका  ends with narration of वसंत  ऋतु  in राग  बसंत : ऋतुराज आज सज के सिंगार,गरवा में डार फूलन के हार |चले झूम झूम छलकाते प्यार |ऋतुराज...|| मंद पवन मकरंद कली में बंद मधुर मधु पान करे | कुहू कुहू कोकिल  पंचम सुर में कूके ,मधु रस का दान करे || लहराए हिया प्रीतम से प्रिया, मिल मिल के जिया में मान करे || यौवन की उमंग तरंग लिए अंग अंग पे वो अभिमान करे || ऋतुराज आज ...